आस्था का किनारा
माँ को गंगा मैया मे बहुत आस्था थी, वो अपने आखिरी दिनो मे कुछ समय गंगा मैया के किनारे बिताना चाहती थी, मै उनकी इच्छा जानता था, लेकिन इस मंहगाई के दौर मे मेरी और मेरी जेब की हालत दयनीय थी, इसलिये मै चाहकर भी माँ की यह इच्छा पूरी नही कर सकता था। माँ भी मेरी हालत से वाकिफ थी वह मेरी मजबूरी समझती थी इसलिये उसने अपनी मनोइच्छा को हमेशा अपने मन मे ही रखा उसे मेरे सामने प्रकट नही होने दिया, माँ थी ना वो।
लेकिन अब उनके गुजर जाने के बाद मैने तय किया कि अन्त मे उन्हे गंगा मैया से हमेशा कि लिये मिला दूंगा, जीतेजी ना सही मरने के बाद तो माँ की इच्छा पूरी कर दू। मैने जैसे तैसे कुछ रूपयो का इंतजाम किया और चल दिया माँ को गंगा मैया से मिलाने के लिये।
माँ कि अस्थिया लिये मै गंगा नगरी के स्टेशन से उतर कर गंगा घाट की तरफ चला तो अचानक ही कुछ त्रिपुण्ड धारी पण्डो ने मुझे घेर लिया और इस तरह से पूझताछ करने लगे जैसे मै पाकिस्तान से आया हूँ, उनमे से कुछ लोगो के मुह से दारू की दुर्गंध दुर तक महक रही थी. मै उन्हें अपनी बेबसी बताकर थोडा आगे बढ़ने लगा, तो नाविको ने मुझे लपक लिया और जबरन नाव मे बैठाने के लिये आपस मे उलझने लगे। अभी ये सब देख ही रहा था की दर्जन भर बलिष्ठ भिखारी आ धमके और मेरे छोटे से थैले के साथ छीना झपटी होने लगी।
हर तरफ से पण्डो मल्लाह और भिखारीयो से घिरा मै बेबस सा अपने हाथ मे माँ कि अस्थिया लिये खड़ा था, मैने एक बार गंगा मैया को देखा और फिर अपनी माँ की तरफ देखा, और आखो मे आंसू लिये माँ से बोला, 'यही आने का सपना था तेरा, अच्छा हुआ तू जीते जी यहाँ नही आयी, वरना देखकर रोती की कितना मैला हो गया है तेरी अस्था का किनारा'।
(अरूण गौड़)
Mo.9897457533
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अफसाना
18-Apr-2022 09:19 PM
बहुत खूब
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Arun Gaud
24-Apr-2022 02:10 PM
Thank you अफसाना जी👍
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Shrishti pandey
18-Apr-2022 02:27 PM
Nice
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Arun Gaud
18-Apr-2022 04:56 PM
Thank you👍
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Punam verma
18-Apr-2022 08:56 AM
Nice
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Arun Gaud
18-Apr-2022 04:56 PM
Thank you Punam ji👍
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